सुदामा पांडेय 'धूमिल'

सुदामा पांडेय 'धूमिल'

Monday, August 28, 2017

धूमिल - कविता


Friday, August 18, 2017

उसके बारे में


पता नहीं कितनी रिक्तता थी-जो भी मुझमे होकर गुजरा -रीत गया
पता नहीं कितना अन्धकार था मुझमे
मैं सारी उम्र चमकने की कोशिश में
बीत गया
भलमनसाहत
और मानसून के बीच खड़ा मैं
ऑक्सीजन का कर्ज़दार हूँ
मैं अपनी व्यवस्थाओं में
बीमार हूँ

                                                                    #उसके_बारे_में / #धूमिल

Friday, August 11, 2017

अन्त में कहूंगा
सिर्फ इतना कहूँगा

हां हां मैं कवि हूं,
कवि-याने भाषा में
भदेस हूँ

इस कदर कायर हूँ
कि उत्तरप्रदेश हूँ।